Friday, January 6, 2012

"शंखनादों से सुबह सहमी है
आर्तनादों से शाम
अमन के नाम पर कफ़न किसने उढ़ाया ?
एक सहमी सी सुबह से मैंने पूछ था ये सच
शाम होते शहर शोकाकुल सा नज़र आया
सच की दुनिया अब अखबारों को अखरती है
झूठ का झंडा उठाये दूरदर्शन दौड़ आया

सुना है गिद्ध की नज़रें हमारे गाँव पर हैं
सुना है चहकती चिड़िया आज चिंतित है
सुना है गाय का बच्चा अपनी मां के दूध से वंचित है
सुना है यहाँ कलियाँ सूख जाती हैं नागफनीयाँ सिंचित हैं
सुना है फूल तोड़े जा रहे हैं मुर्दों पे चढाने को
सुना है कांटे तो खुश हैं पर राहें रक्तरंजित हैं
सुना है शब्द सहमे हैं साँसें थम गयी हैं

अमन के नाम पर कफ़न किसने उढ़ाया ?

एक सहमी सी सुबह से मैंने पूछ था ये सच


शाम होते शहर शोकाकुल सा नज़र आया

घर पे आया सबको हंसाया
छत पे जाके अपने आंसू पोंछ आया
आवाज़ देकर फलक से मुझे किसने बुलाया
भूकंप से काँपे घर की देहरी पर दिया किसने जलाया
शंखनादों से सुबह सहमी है

आर्तनादों से शाम


अमन के नाम पर कफ़न किसने उढ़ाया ?

एक सहमी सी सुबह से मैंने पूछ था ये सच


शाम होते शहर शोकाकुल सा नज़र आया

आवाज़ देकर फलक से मुझे किसने बुलाया

भूकंप से काँपे घर की देहरी पर दिया किसने जलाया. "
" समय की सूखी नदी मैं याद की नावें
लोकलाजों से सहमते सत्य से रिश्ते
हमारी आँख की सरहद पे सिमट आया है ये आंसू
शब्द सच के सारथी अब हैं नहीं
शब्द के काँधे पे हैं अर्थ की अब अर्थियां
देह के इन रास्तों से रिश्ते गुजरे हैं बहुत
नाप पाओ तो बताना भावना को भौतिकी से
समय की सूखी नदी और भावना भयभीत है
लोकलाजों से सहमते सत्य का संगीत सुनलो
हमारी आँख की सरहद पे सिमट आया है ये आंसू
भावना भूगोल की होती नहीं है
सोचना फिर सच बताना
रिश्ते जो आकार लेना चाहते थे
होठ पर सहमे खड़े खड़े गुमनाम क्यों थे." -

मिलिए दिग्विजय सिंह जी से हिदुत्व को गाली देने वाले १९९७ में विश्व हिन्दू परिषद् के कार्यक्रम मैं उपस्थित थे| दिग्विजय की संघ से पुरानी करीबी?

Source: agency | Last Updated 22:53(05/01/12)

नई दिल्ली. संघ के पूर्व प्रमुख प्रोफेसर राजेंद्र सिंह रज्जू भैया और विश्व हिंदू परिषद से जुड़े अशोक सिंघल के साथ मंच पर बैठे हुए दिग्विजय सिंह की तस्वीर सामने आने के बाद टीम अन्ना ने हमला बोल दिया है। टीम अन्ना के सदस्य संजय सिंह ने गुरुवार को कहा कि दिग्विजय सिंह के आरएसएस से घनिष्ठ संबंध हैं। संजय सिंह का कहना है कि दिग्विजय का बीजेपी और संघ से गहरा नाता है। वे बीजेपी और संघ का नाम नितिन गडकरी से ज़्यादा लेते हैं। संजय ने कहा, 'दिग्विजय सिंह कांग्रेस के भीतर आरएसएस और भाजपा के सबसे बड़े समर्थक हैं।'

लेकिन दिग्विजय सिंह ने तस्वीर सामने आने के बाद अपने बचाव में कहा है कि उस कार्यक्रम में वे कांची के शंकराचार्य के बुलावे पर गए थे और इसके लिए उन्होंने पार्टी से इजाजत ली थी। दिग्विजय सिंह ने कहा, 'आरएसएस से जुड़े लोगों ने अन्ना पर किताब लिखी। क्या उन्होंने मेरे ऊपर किताब लिखी? अन्ना को आरएसएस का समर्थन स्वीकार कर लेना चाहिए। अन्ना को लोगों को यह भी बताना चाहिए कि जनलोकपाल की जरूरत नहीं है, वे सभी बीजेपी में शामिल हों और उनका शुद्धिकरण हो।'

मजबूत लोकपाल की मांग कर रहे अन्ना हजारे को आरएसएस का एजेंट साबित करने में जुटी रही कांग्रेस को अब संघ जवाब देने की तैयारी की है। संघ के मुखपत्र पांचजन्य के अगले में अंक में संघ अन्ना और उनके सहयोगियों पर सबसे ज़्यादा हमला करने वाले दिग्विजय सिंह की पोल खोलने की तैयारी है।

अन्ना हजारे और समाजसेवी नानाजी देशमुख के रिश्तों का दावा कर टीम अन्ना को बैकफुट पर धकेलने की कोशिश कर चुके दिग्विजय सिंह की संघ और वीएचपी नेताओं के साथ मंच पर तस्वीर खोज निकाली गई है। इसमें कांग्रेस महासचिव हरिद्वार में आयोजित 1997 के विराट हिंदू सम्मेलन के दौरान संघ के तत्कालीन प्रमुख प्रोफेसर राजेंद्र सिंह उर्फ रज्जू भैया और विश्व हिंदू परिषद के तत्कालीन अध्यक्ष अशोक सिंघल के बीच बैठे नजर आ रहे हैं।

यूपी चुनाव के बीच रज्जू भैया और अशोक सिंघल के साथ दिग्विजय सिंह की करीबी कांग्रेस के उत्तर प्रदेश के प्रभारी पर भारी पड़ सकती है। पांचजन्य के इस अंक में सिर्फ तस्वीर ही नहीं बल्कि लेख के जरिए भी दिग्विजय सिंह को जवाब देने की योजना है। ‘अपने गिरेबां में झांके दिग्विजय सिंह’ शीर्षक से लेख में आरएसएस की भारत के प्रति निष्ठा और समर्पण साबित करने के लिए बताया गया है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने 1963 में आरएसएस के निवेदन के बाद संघ को गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल होने की इजाजत दी थी।

Thursday, January 5, 2012










































सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है,
देखना है जोर कितना बाजु-ए-कातिल में है ।

एक से करता नहीं क्यों दूसरा कुछ बातचीत,
देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफिल में है ।

रहबरे-राहे-मोहब्बत रह न जाना राह में
लज्जते-सेहरा-नवर्दी दूरि-ए मंजिल में है ।

यूँ खड़ा मकतल में कातिल कह रहा है बार-बार
क्या तमन्ना-ए-शहादत भी किसी के दिल में है?

ऐ शहीदे-मुल्को-मिल्लत मैं तेरे ऊपर निसार
अब तेरी हिम्मत का चर्चा ग़ैर की महफिल में है ।

वक्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आसमाँ,
हम अभी से क्या बतायें क्या हमारे दिल में है ।

खींच कर लाई है सबको कत्ल होने की उम्मींद,
आशिकों का आज जमघट कूंच-ए-कातिल में है ।

सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है,
देखना है जोर कितना बाजु-ए-कातिल में है ।

है लिये हथियार दुश्मन ताक में बैठा उधर
और हम तैय्यार हैं सीना लिये अपना इधर

खून से खेलेंगे होली गर वतन मुश्किल में है
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

हाथ जिनमें हो जुनून कटते नहीं तलवार से
सर जो उठ जाते हैं वो झुकते नहीं ललकार से

और भडकेगा जो शोला-सा हमारे दिल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

हम तो निकले ही थे घर से बांधकर सर पे कफ़न
जाँ हथेली पर लिये लो बढ चले हैं ये कदम

जिंदगी तो अपनी मेहमाँ मौत की महफ़िल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

दिल मे तूफानों की टोली और नसों में इन्कलाब
होश दुश्मन के उडा देंगे हमें रोको न आज

दूर रह पाये जो हमसे दम कहाँ मंजिल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

Monday, December 26, 2011

ये मसाइले तसव्वुफ़ ये तेरा बयान गालिब

तुम हम बलि समझते जो न बादाख्‍खार होता

ईश्‍वरीय प्रेम की ये अदभुत बातें , कि वेद ईर्ष्‍या करें।

ये मसाइले-तसव्वुफ़.....

सूफियाना बातें। ये मस्‍ती की बातें।

ये तेरा बयान ग़ालिब

और तेरा कहने का यह अनूठा ढंग, कि उपनिषाद शर्मा जाएं।

पहले घर के भेदियो के सर उडाये जायेंगे..

सांप आस्तीनों के न जब तक मारे जायेंगे..
हौंसला कितना भी हो हम जंग हारे जायेंगे..
दुश्मनों की मारकाट तो बाद में होगी..
पहले घर के भेदियो के सर उडाये जायेंगे..

मुल्ला अग्निवेश कल जामा मस्जिद दिल्ली में एक सभा में गया था , कथित बाबरी मस्जिद को दुबारा बनाने की माग हो रही थी, जिसमे अग्निवेश ने भी बोला की आडवानी और मुरली जोशी को तुरंत गिरफ्तार करना चाहिए और दुबारा से कथित बाबरी मस्जिद को बनाना चाहिए ! अग्निवेश ने संघ और बजरंग दल को बैन करने की भी मांग की है ! अग्निवेश ने बोला की ..क्या साबुत है आडवानी के पास की राम का जन्म स्थान यही पर है ! इस मौके पर उसके साथ जामा मस्जिद के इमाम और इलाके के विधायक शोइब इकबाल भी साथ में था ! अब बहुत हो गया, इस अग्निवेश को कुछ करना पड़ेगा ! महंत नित्यान्नद जी ने एक बार इसको धोया था लगता है की अब ये भूल गया है उस धुलाई को ! सब से पहले इसका भगवा वस्त्र उतरना पड़ेगा !
जय श्री राम जय भारत !!

देशद्रोही की कुछ तस्वीरें...




तो क्या बात है

आस्ट्रेलियंस के साथ डा.एल.एस.आचार्य

किताबो के पन्ने पलट के सोचता हूँ
यू पलट जाय मेरी जिंदगी तो क्या बात है
ख्वाबों में जो रोज मिलते है
जो हकीकत में आये तो क्या बात है
कुछ मतलब के लिए ढूढ़ते है सब मुझको
बिन मतलब जो आये तो क्या बात है
कत्ल करके तो सब ले जायेंगे दिल मेरा
कोई बातो से ले जाये तो क्या बात है
जो शरीफों की शराफत में बात न हो
एक शराबी कह जाये तो क्या बात है
अपने रहने तक तो ख़ुशी दूंगा सबको
जो किसी को मौत पे ख़ुशी दे जाये तो क्या बात है